यह कहानी प्रेमचंद की बाल कहानियों में से एक "नादान दोस्त" पर आधारित है। कहानी में केशव और उसकी बहन स्यामा रहते हैं, जो एक चिड़िया के अंडों को देखकर उसकी देखभाल करने का फैसला करते हैं। बच्चे चिड़िया के अंडों के बारे में अनेक सवाल उठाते हैं और उनकी चिंता इस बात को लेकर होती है कि चिड़िया के बच्चे कैसे बड़े होंगे और उन्हें खाने के लिए क्या मिलेगा। वे सोचते हैं कि चिड़िया को दाना देने के लिए वे कार्निस पर थोड़ा दाना रख देंगे ताकि उसे उड़कर कहीं और न जाना पड़े। इसके अलावा, वे यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चिड़िया के बच्चों को गर्मी और प्यास से राहत मिले। इस विचार को अमल में लाने के लिए, वे कपड़े की छत बनाने और पानी की प्याली भी तैयार करते हैं। हालांकि, बच्चों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे कपड़े का सही स्थान और टोकरी का इस्तेमाल करना। कहानी बच्चों की मासूमियत, जिज्ञासा और चिड़िया के प्रति उनके प्यार को दर्शाती है। यह न केवल बच्चों की सरलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि वे कैसे अपने छोटे से कार्यों के माध्यम से किसी की मदद करना चाहते हैं।
भाग-४- प्रेमचंद की बाल कहानियाँ
by Munshi Premchand
in
Hindi Children Stories
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Description
Part-4 - Premchand ki Bal Kahaniya
रेमचंद हिंदी के उन महान् कथाकारों में थे, जिन्होंने बडों के लिए विपुल कथा-संसार की रचना के साथ-साथ विशेष रूप से बच्चों के लिए भी लिखा। उस समय एक ओर स...
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