रसोई में चाय उबल रही थी। रश्मि अदरक कूट रही थी और सौम्या कप ट्रे में सजा रही थी। ...
शादी में पाँच दिन बाकी थे। सौम्या का फोन अचानक कंपन करता है। वह चौंकती है। स्क्रीन पर करण ...
रात का जंगल कीड़ों की किटकिट और सियारों की हुंकारों से भरा था। पुराने पत्थर की खदान के पास ...
शादी में छह दिन बाकी थे। आँगन में मेहँदी की रस्म चल रही थी। सौम्या ज़मीन पर बिछे गद्दों ...
मटन बिरयानी की खुशबू अब भी हवा में तैर रही थी। मंत्री जगनमोहन दयाल ने उँगलियाँ धोते हुए तसल्ली ...
बाथरूम वाली घटना की उसी शाम, बड़ी हवेली होने वाली शादी की सजावट से जगमगा रही थी। यही हवेली ...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, ...
रंजीत की कहानी समाप्त होते ही अलाव की धीमी चटक सबसे तेज़ आवाज़ बन गई। कोई कुछ नहीं बोला। ...
अस्पताल से लौटकर शाम ढलने तक हम सब चुपचाप एक साथ बैठे रहे। मौसी के कमरे की डरावनी हालत, ...
मैंने फ़ोन स्क्रीन की आख़िरी लाइन दोबारा पढ़ी—“जमालीपुरा अस्पताल पहुँचिए। जल्दी।” दिल की धड़कन तेज़ हो गई। “निश! बाहर ...