'विशाल गुरुकुल' का सबसे ऊँचा शिखर, जिसे 'ब्रह्म-कक्ष' कहा जाता था, आज किसी श्मशान जैसी शांति ओढ़े हुए था। ...
दूसरी ओर... गुरुकुल का श्मशान सा सन्नाटागुरुकुल के भीतर, तबाही के निशान और भी गहरे थे। आचार्य विक्रम और ...
नियति का रक्त-अभिषेक और महाप्रस्थानकहते हैं कि विनाश से ठीक पहले की खामोशी सबसे डरावनी होती है, लेकिन गुरुकुल ...
रूहों का सौदाक्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक ...
अध्याय 26: संकल्प की वापसीपहाड़ियों की उन ऊँचाइयों पर जहाँ हवा भी जम जाती है, वहां सिर्फ एक चीज़ ...
नक्षत्र यात्री - अध्याय 4: थकान और संकल्पपोर्टल के भीतर का दृश्य वैसा नहीं था जैसा माया ने कल्पना ...
आदरणीय संपादक महोदय, यह 'शापित प्रेम की छाया' का अगला भाग है। इसमें अध्याय 2 से लेकर 25 तक ...
'नक्षत्र यात्री: हिमालय की कलाकृति' (सम्पूर्ण कहानी)अध्याय 1: एक साहसी पुरातत्ववेत्ता एक प्राचीन, भूरे पत्थर का मुहाना था—भगवान शिव ...
शीर्षक: शापित प्रेम की छाया हुक: "उसकी मौत, मेरी अपनी मौत है।" सारांश: इज़ोल्ड एक ऐसी शापित हकीकत में जागती है जहाँ ...