मन के अल्फाज - ख्वाहिश की कविताएं।

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1.स्याही का दामन। मेरे लफ्जो ने स्याही का दामन थाम लिया है। अब लिखूँगी मैं अपनी किश्मत अपने ही हाथो से। लिखूँगी अपना हर ख्वाब कायम,कोई अधूरी ख्वाहिश ना छूटने दूंगी।भर दूंगी रंग आशमा मैं, इंद्रधनुष से रंगोली लिख दूंगी। माँ के आँचल की छाओं लिखूँगी। पिता का सर पे हाथ लिखूँगी। गुलशन मैं बहार–ऐ–शाम लिख लिखूँगी। इस दुनिया को गुलफाम लिख दूंगी।ये धरती गगन फूलों से सजा हो, ऐसा ही मंजर हर दफा हो, बागबाँ आशमा को जमीं को बाग़ लिख दूंगी। खुशियों के कई पेड़ हंसी के गुलाब लिखूँगी। सींचे जो मिट्टी को ऐसी कई फुहार लिख दूंगी।जहाँ बैठे बूढ़े और बच्चे साथ बो चौपाल लिखूँगी। 

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मन के अल्फाज - ख्वाहिश की कविताएं। - 1

1.स्याही का दामन। मेरे लफ्जो ने स्याही का दामन थाम लिया है।अब लिखूँगी मैं अपनी किश्मत अपने ही हाथो अपना हर ख्वाब कायम,कोई अधूरी ख्वाहिश ना छूटने दूंगी।भर दूंगी रंग आशमा मैं,इंद्रधनुष से रंगोली लिख दूंगी।माँ के आँचल की छाओं लिखूँगी।पिता का सर पे हाथ लिखूँगी।गुलशन मैं बहार–ऐ–शाम लिख लिखूँगी।इस दुनिया को गुलफाम लिख दूंगी।ये धरती गगन फूलों से सजा हो,ऐसा ही मंजर हर दफा हो,बागबाँ आशमा को जमीं को बाग़ लिख दूंगी।खुशियों के कई पेड़ हंसी के गुलाब लिखूँगी।सींचे जो मिट्टी को ऐसी कई फुहार लिख दूंगी।जहाँ बैठे बूढ़े और बच्चे साथ बो चौपाल लिखूँगी।हर दिल दीन ईमान का ...Read More