बाहर मुंबई की कभी न थमने वाली रफ़्तार थी और केबिन के अंदर एक गला घोंटने वाली खामोशी। पुराने एयर कंडीशनर की घरघराहट ऐसी लग रही थी जैसे कोई वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें ले रहा हो। आरंभी शास्त्री के लिए बस वही एक आवाज़ थी जो उसे बेहोश होने से बचा रही थी। सामने मेज पर फाइलों का अंबार लगा था—सफेद कागजों के वे ढेर किसी 'कब्रिस्तान' की तरह लग रहे थे, जहाँ उसके पिता दिग्विजय शास्त्री के बिजनेस साम्राज्य की लाश दफन थी। आरंभी जैसे-जैसे पन्ने पलटती, वे डिजिटल नंबर्स उसे डसने लगते। बैलेंस शीट कभी बैलेंस नही
लाल इश्क - 1
बाहर मुंबई की कभी न थमने वाली रफ़्तार थी और केबिन के अंदर एक गला घोंटने वाली खामोशी। पुराने कंडीशनर की घरघराहट ऐसी लग रही थी जैसे कोई वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें ले रहा हो। आरंभी शास्त्री के लिए बस वही एक आवाज़ थी जो उसे बेहोश होने से बचा रही थी।सामने मेज पर फाइलों का अंबार लगा था—सफेद कागजों के वे ढेर किसी 'कब्रिस्तान' की तरह लग रहे थे, जहाँ उसके पिता दिग्विजय शास्त्री के बिजनेस साम्राज्य की लाश दफन थी। आरंभी जैसे-जैसे पन्ने पलटती, वे डिजिटल नंबर्स उसे डसने लगते। बैलेंस शीट कभी बैलेंस नहीं हो रही ...Read More