रात का वक्त था।नादवात यूनिवर्सिटी देहरादून का कैम्पस पूरी तरह खामोश डूबा हुआ था। पुरानी इमारतों की छतों पर चाँदनी फैल रही थी, और उनकी परछाइयाँ ज़मीन पर अजीब-सी आकृतियाँ बना रही थीं। हवा में हल्की ठंडक थी और दूर कहीं कोई आवाज़ नहीं थी।रात के ठीक 1:30 बज रहे थे।उसी खामोशी के बीच पाँच लड़के—आरव, समीर, वंश, करण और मंजीत—सिक्योरिटी गार्ड की नजरों से बचते हुए यूनिवर्सिटी के अंदर घूम रहे थे। उनके चेहरों पर उत्साह और शरारत साफ झलक रही थी। यह उनके लिए सिर्फ मस्ती नहीं थी, बल्कि एक तरह का देरिंग एडवेंचर था।
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THE PIANO MEN - 1
भाग 1 : खामोशी के बीच शरारतरात का वक्त था।नादवात यूनिवर्सिटी देहरादून का कैम्पस पूरी तरह खामोश डूबा हुआ पुरानी इमारतों की छतों पर चाँदनी फैल रही थी, और उनकी परछाइयाँ ज़मीन पर अजीब-सी आकृतियाँ बना रही थीं। हवा में हल्की ठंडक थी और दूर कहीं कोई आवाज़ नहीं थी।रात के ठीक 1:30 बज रहे थे।उसी खामोशी के बीच पाँच लड़के—आरव, समीर, वंश, करण और मंजीत—सिक्योरिटी गार्ड की नजरों से बचते हुए यूनिवर्सिटी के अंदर घूम रहे थे। उनके चेहरों पर उत्साह और शरारत साफ झलक रही थी। यह उनके लिए ...Read More