अध्याय 1 — रामगढ़ में मेनका का आगमन सुबह की धूप अभी-अभी पहाड़ियों के पीछे से झाँकने लगी थी। रामगढ़ गाँव की मिट्टी से उठती हल्की भाप, खपरैल के घरों की छतों से टपकती ओस की बूंदें, और कहीं दूर बैलों की घंटियों की आवाज़ — ये सब मिलकर उस गाँव की पहचान बनाते थे। गाँव छोटा था, पर लोग मेहनती और सरल थे। यहाँ हर कोई एक-दूसरे को जानता था, और किसी अजनबी का आना पूरे गाँव के लिए चर्चा बन जाता था। पर आज जो आने वाली थी, वो सिर्फ “अजनबी” नहीं थी — वो एक रहस्य थी।

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मेनका - भाग 1

मेनका भाग 1️ लेखक: राज फुलवरे---अध्याय 1 — रामगढ़ में मेनका का आगमनसुबह की धूप अभी-अभी पहाड़ियों के पीछे झाँकने लगी थी।रामगढ़ गाँव की मिट्टी से उठती हल्की भाप, खपरैल के घरों की छतों से टपकती ओस की बूंदें, और कहीं दूर बैलों की घंटियों की आवाज़ — ये सब मिलकर उस गाँव की पहचान बनाते थे।गाँव छोटा था, पर लोग मेहनती और सरल थे।यहाँ हर कोई एक-दूसरे को जानता था, और किसी अजनबी का आना पूरे गाँव के लिए चर्चा बन जाता था।पर आज जो आने वाली थी, वो सिर्फ “अजनबी” नहीं थी — वो एक रहस्य ...Read More

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मेनका - भाग 2

मेनका भाग 2लेखक: राज फुलवरेअध्याय तीन — गाँव के लोग और मेनका का जालगाँव के चौपाल पर अब हर मेनका का दरबार लगता था.लाल चुनरी ओढे, चंदन की खुशबू में भीगी हुई,वो ऊँचे आसन पर बैठती और उसके चारों ओर गाँववाले जुट जाते.>“ मेनका देवी, मेरे बेटे का व्यापार ठप पडा है.मेनका दीदी, मेरी बेटी की शादी में बरकत नहीं है.हर कोई उसके पास किसी न किसी उम्मीद के साथ आता.और मेनका, अपने मीठे शब्दों से सबका दर्द बाँटती.वो हर समस्या का हल बताती —कभी तावीज, कभी जल चढाने का उपाय, तो कभी“ निवेश योजना” में और धन लगाने ...Read More