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उज्जैन एक्सप्रेस - 4

by Lakhan Nagar

"कुछ लोग मौत से डरते हैं... और कुछ लोग हर रोज़ उसी से मिलने की तैयारी करते हैं।" ...

उज्जैन एक्सप्रेस - 3

by Lakhan Nagar
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"कभी-कभी इंसान अपनी मौत नहीं चाहता... वो सिर्फ अपने बोझ से आज़ादी चाहता है।" रात का वक्त था। ...

उज्जैन एक्सप्रेस - 2

by Lakhan Nagar
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"कभी-कभी प्यार मर नहीं जाता... बस सिसकता रहता हैं , दिल के किसी कोने में , ज़िंदा लाश बनकर।" ...

उज्जैन एक्सप्रेस - 1

by Lakhan Nagar
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विषय सूची प्राक्कथन अध्याय 1 : रमन - पढाई या दबाव अध्याय 2 : सुजल - ...

तितलियाँ - 1

by Lakhan Nagar
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हर काली रात सूरज की एक किरण के साथ खत्म होती हैं । पर कुछ राते ऐसे होती हैं ...

सानिध्या

by Lakhan Nagar
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अंततया , अंतिम रूप से रेलवे की परीक्षा में चयन के बाद आज देहरादून से दिल्ली जा रहा हूँ ...

तिराहा

by Lakhan Nagar
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बरसात का दिन था हल्की-हल्की बौछारे बालकनी से अन्दर आ रही थी। अचानक सीमा कंधे पर हाथ रखती है ...