नियति का मोड़शहनाइयाँ बज रही थीं।मंडप में अग्नि जल रही थी।फूलों की खुशबू और हवन की धूप के बीच, ...
नवंबर की हल्की ठंड...और मीठी-सी धूप में...आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही ...