Dr. Suryapal Singh Books | Novel | Stories download free pdf

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 10

by Dr. Suryapal Singh

ब्रीफकेस मैंने मेज के नीचे रख दिया। मैंने पराठा खा कर भुगतान दिया और चलने को हुआ तो देखा ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 9

by Dr. Suryapal Singh
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थाइलैंड में चाय को ‘चा’ कहते हैं जिसमें दूध नहीं डाला जाता। दूध मिलाकर चाय प्रायः होटलों में ही ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 8

by Dr. Suryapal Singh
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‘कलमजीवी निराला’ बाद में ‘गीत गाने दो मुझे’ नाम से प्रकाशित हुआ। जो बच्चे नाटक से जुड़े उन्होंने निःस्वार्थ ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 7

by Dr. Suryapal Singh
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जुलाई 1973 में कालेज में ही परिवार के साथ रहने की व्यवस्था कर ली थी। पत्नी मेरे बच्चे और ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 6

by Dr. Suryapal Singh
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1966 में गोण्डा मुख्यालय में डिग्री कालेज खुल गया। थोड़े दिनों के लिए श्याम जी साहब उसके प्राचार्य का ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 5

by Dr. Suryapal Singh
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1957 में ही प्रयाग में साहित्यकारों का एक सम्मेलन हुआ था। उस सम्मेलन में श्रोता के रूप में मैं ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 4

by Dr. Suryapal Singh
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1953 में ही लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों पर गोली चल गई थी उस समय चंद्रभान गुप्त मुख्यमंत्री, जुगुल किशोर ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 3

by Dr. Suryapal Singh
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जीतेशकान्त पाण्डेय- कक्षा पाँच उत्तीर्ण कर आपने मिडिल स्कूल में प्रवेश लिया। मिडिल स्कूल का अनुभव कैसा रहा?डॉ0 सूर्यपाल ...

नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई - 2

by Dr. Suryapal Singh
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जीतेशकान्त पाण्डेय- आप बचपन की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र करते रहे हैं। वह घटनाएं कौन सी थी?डॉ0 सूर्यपाल ...

नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई - 1

by Dr. Suryapal Singh
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नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई डॉ0 सूर्यपाल सिंह साक्षात्कार ...