ऋग्वेद सूक्ति --(5) की व्याख्या"यो जागार तमृच: कामयन्ति"ऋग्वेद--5/44/14भावार्थ --जो जागता है उसे ऋचाएँ चाहती हैं।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (6) की व्याख्या"अग्ने नय सुपथा राए अस्मान"ऋग्वेद--1/189/1भावार्थ,--हे ईश्वर (अग्नि देव) ! मुझे धन के लिए सन्मार्ग पर ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (7) की व्याख्या"न यस्य हन्यते सखा न जीयतेऋगुवेद- --10/152/1भावार्थ --हे प्रभु! आपके भक्त को न कोई नष्ट ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (8) की व्याख्या"न विन्धेश्य सुष्टतिम"ऋगुवेद --1/1/7भावार्थ --मै स्तुति से पार नहीं पा सकता।उद्धृत मन्त्र ऋग्वेद 1.7.7 का ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (9) की व्याख्या"महे चन त्वामंद्रिव:परांशुल्काय देयाम्"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ --हे ईश्वर ! मैं आपको किसी भी मूल्य पर नहीं ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (10)की व्याख्या"न रिष्येत त्यावत: सखा"ऋगुवेद --1/91/8भावार्थ --हे ईश्वर !आपका सखा (भक्त) कभीनष्ट नहीं होता।ऋग्वेद १।९१।८ का पूरा ...
ऋगुवेद सूक्ति--(11)की व्याख्या"एको विश्वस्य भुवनस्य राजा"ऋगुवेद --6/36/4भावार्थ -समस्त लोकों का वह स्वामी एक है।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद ६.३६.४ ...
ऋगुवेद सूक्ति-(१२) की व्याख्या-“त्वमस्माकं तव स्मसि”ऋगुवेद --८/९२/३२भावार्थ --प्रभु ! तू हमारा है हम तेरे हैं।यह आत्मसमर्पण, आश्रय और दिव्य–संबंध ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (१३) की व्याख्याअधाम इन्द्र श्रणवो हवेमा — ऋग्वेद ७/२९/३भावार्थ --हे प्रभो ! हमारी पुकार को सुनो।पदच्छेद--अधाम । ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (१४) की व्याख्याऋग्वेद के मंत्र “यस्तन्न वेद किमृचा करिष्यति""… (१.१६४.३९)भावार्थ --ब्रह्म-तत्त्व को जाने बिना वेद-मंत्रों का पाठ ...