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श्रापित एक प्रेम कहानी - 68

by CHIRANJIT TEWARY
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दक्षराज अघोरी बाबा से कहता है--> ठिक है ठिक है आप पहले सांत हो जाईए और आप अंदर आईए ...

तेरे मेरे दरमियान - 93

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी आदित्य को अपने साथ रहने के लिए बोल रही थी तब आदित्य सौचता है --" काश ये तुम ...

तेरे मेरे दरमियान - 92

by CHIRANJIT TEWARY
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अशोक उन दोनो को दैखकर खुश हो जाता है और भगवान से कहता है --अशोक :- हे भगवान , ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 67

by CHIRANJIT TEWARY
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वर्शाली हैरानी से कहती है --> आपके घर ?एकांश कहता है --> हां मेरे घर ।एकांश उत्साह से कहता ...

तेरे मेरे दरमियान - 91

by CHIRANJIT TEWARY
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आदित्य: - मुझे तुझ पर पहले से ही शक था के कभी ना कभी ऐसा ही हरकत जरुर करेगा ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 66

by CHIRANJIT TEWARY
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चेतन कहता है।> गुरुदेव जब मैं हॉस्पिटल से भागकर दक्षराज के घरगया था । तब वहां पर मुझे घर ...

तेरे मेरे दरमियान - 90

by CHIRANJIT TEWARY
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आदित्य पुनम की और दैखता है और एक हल्की मुस्कान देता है और कहता है --आदित्य :- बस यूं ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 65

by CHIRANJIT TEWARY
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एकांश वर्शाली के कंधे पर अपना हाथ रख कर कहता है।> हां वर्शाली बताओ मुझे मैं जानना चाहता हूँ ...

तेरे मेरे दरमियान - 89

by CHIRANJIT TEWARY
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विकास :- मतलब साफ है जानवी , तुम्हारे दिल मे मेरे लिए प्यार है ही नही । मुझे तो ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 64

by CHIRANJIT TEWARY
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वर्षाली झट से वहां से उठ जाती है और कमरे के बाहर जाने लगती है। वर्शाली को यूं अचानक ...