दोहे : सुशील यादव

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जिससे भी जैसे बने ,ले झोली भर ज्ञान चार-दिवस सब पाहुने ,सुख के चार-पुराण मिल जाए जो राह में, साधू -संत -फकीर चरण धूलि माथे लगा ,चन्दन , ज्ञान-अबीर जिससे भी जैसे बने ,ले झोली भर ज्ञान चार-दिवस सब पाहुने ,सुख के चार-पुराण मिल जाए जो राह में, साधू -संत -फकीर चरण धूलि माथे लगा ,चन्दन , ज्ञान-अबीर