* मुलाकात.....आख़िर मुलाक़ात होती क्या है?दो लोगों का एक-दूसरे के सामने आ जाना?एक-दूसरे से नाम पूछ लेना?कुछ देर बातें कर लेना और फिर अपनी-अपनी ज़िंदगी में वापस चले जाना?शायद नहीं।क्योंकि हर रोज़ न जाने कितने लोग हमारे सामने से गुज़रते हैं। हम उन्हें देखते हैं, वे हमें देखते हैं, और अगले ही पल हम दोनों एक-दूसरे के लिए अनजान हो जाते हैं।तो फिर कुछ मुलाक़ातें याद क्यों रह जाती हैं?किसी पहली मुलाक़ात का कोई निश्चित समय नहीं होता।कभी वह एक नज़र होती है, कभी एक सवाल, कभी किसी अनजान इंसान की कही हुई एक छोटी-सी बात।और कभी-कभी...हमें पता भी नहीं