एपिसोड 37— वो वादा जो पंद्रह साल से छुपा थारात काफी हो चुकी थी।वशिष्ठ हवेली के लगभग सारे कमरे अंधेरे में डूबे हुए थे, लेकिन अर्जुन के कमरे की लाइट अभी भी जल रही थी।उसके सामने उसके दादा अविनाश वशिष्ठ की पुरानी डायरी खुली पड़ी थी।बार-बार उसकी नजर उसी अधूरी लाइन पर जा रही थी—"अगर कभी रहमान वापस आया, तो बच्ची को उसके हवाले मत करना। क्योंकि रहमान जिस चीज़ की तलाश में है, वह सिर्फ बच्ची नहीं है..."इसके आगे का पन्ना फटा हुआ था।अर्जुन ने डायरी को पलटकर देखा।"आखिर बाकी हिस्सा कहाँ गया?"तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।अर्जुन ने तुरंत