" इधर-उधर घूमने के अलावा कभी घर के कामों पर भी ध्यान दे दिया कर, हमेशा घूमती रहती है...! " गरिमा ने आंखें तरेरते हुए पंखुड़ी की तरफ देख कर कहागरिमा की जलती हुई बातें सुन पंखुड़ी के बगल में खड़ी उसकी सहेली रिया ने हौले से पलक का कंधा थपथपाया और दबे पांव वहां से खिसक गई।पलक अपनी सौतेली मां गरिमा की बातें सुनती हुई कमरे के भीतर चली गई । उसको कितनी ही बातें सुनाते हुए गरिमा न जाने क्या क्या बोले जा रही थी , और पलक चुपचाप उनकी बातें सुनते हुए घर के कामों को निपटाने