तिलस्मीभाग द्वितीयरात के अँधेरे में आकाश पर तारे टिमटिमा रहे थे। उदय सिंह अमर सिंह को पुकारता हुआ तिलस्मी महल के भीतर उसकी तलाश में आगे बढ़ रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अमर सिंह आखिर कहाँ चला गया।वह महल के उन हिस्सों की ओर बढ़ता गया, जहाँ वे दोनों आज तक कभी नहीं गए थे। आगे बढ़ते-बढ़ते उसे तिलस्मी महल के भीतर जाने का एक अनजाना रास्ता दिखाई दिया।उदय सिंह सावधानी से उस रास्ते पर आगे बढ़ा। कुछ दूर जाने पर उसकी नजर एक रहस्यमयी दरवाजे पर पड़ी। दरवाजे पर दो हंसों की सुंदर प्रतिमाएँ बनी