Episode 15 – जब बात दिल से घर तक पहुँचे कुछ रिश्तेतय नहीं किए जाते,वे धीरे-धीरेअपनी जगह बना लेते हैं।बिल्कुल वैसेजैसे घर मेंकिसी पुराने फ़र्नीचर के बीचएक नई चीज़ रख दी जाए—शुरू में अजनबी,फिर ज़रूरी।Episode 14 के बादPriyam के भीतरकुछ बदल गया था।अब वह हर छोटी बात परअपने मन को टटोलती नहीं थी।अब उसे बार-बारये साबित करने की ज़रूरत नहीं लगती थीकि वह सही कर रही हैया नहीं।वह बसअपने भीतर के संतुलन कोमहसूस कर रही थी।सुबह उठते हीउसने खिड़की खोली।हवा हल्की थी,धूप धीमी।उसे लगा जैसेज़िंदगी भीउसी रफ्तार सेचल रही हैजिसकी उसे ज़रूरत थी।रसोई सेबर्तनों की आवाज़ आ रही थी।माँ कुछ बना