Episode 13 – जब फैसला भीतर से आता हैकुछ फैसलेलोगों के सामने लिए जाते हैं,और कुछखुद के सामने।Priyam को अब यह साफ़ दिखने लगा थाकि उसका असली संघर्षपरिवार या समाज से नहीं,खुद के डर से था।और डरअब धीरे-धीरेअपनी पकड़ ढीली कर रहा था।सुबह जब उसकी आँख खुली,तो मन में अजीब-सी शांति थी।कोई भारीपन नहीं,कोई जल्दबाज़ी नहीं।बस एक साफ़ एहसास—अब भागना नहीं है।वह उठी,खिड़की खोली।धूप आज ज़्यादा तेज़ नहीं थी,पर उजली थी।उसने मन ही मन सोचा—“शायद फैसले भी ऐसे ही होते हैं,न बहुत तेज़,न बहुत धीमे—बस सही।”नाश्ते की मेज़ परमाँ कुछ देर से उसे देख रही थीं।“आज तुम अलग लग रही