देखते ही देखते पूरा केबिन खाली हो गया, अब वहां सिर्फ अंकिता बची थी। जैसे ही वह वहां से निकलने के लिए उठी, उसकी नजर हेड चेयर पर पड़ी। उस शख्स को देखते ही अंकिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। रणविजय के चेहरे पर जो गुस्सा, डर और नफरत का मिश्रण था, उसे देखकर अंकिता बुरी तरह कांपने लगी। वह जैसे ही वहां से भागने की कोशिश करने लगी, रणविजय ने बिजली की फुर्ती से उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ जोर से खींचा। झटके से अंकिता सीधे उसके सीने से जा टकराई। उसके बिखरे हुए बाल उसके