किघकन्या - 5

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कुछ दिनों में ही वीर सिंह का हाल भयावह हो गया था ... आॅंखें खुन सरीखी लाल ... कांपती देह  ... आवाज धीमी, ऐसी मानों कोई फुसफुसा रहा हो मगर सांसों का स्वर बेहद तीव्र ... संपूर्ण शरीर में दर्द की लहर सी दौड़ती रहती थी  ... अन्न खाया नहीं जाता था, जो कुछ जबरदस्ती खाता वो भी कै हो जाता था  ... शरीर धीरे - धीरे कमजोर हो कर हड्डियों का ढांचा मात्र रह गया था, जैसे कोई उसके शरीर का शक्ति चूस रहा हो ... वीर सिंह की जीवन शक्ति खत्म होती जा रही थी .................. बड़ी ठकुराइन  समझ