एपिसोड 7बेचैनी का नाम... शायद मोहब्बतअर्जुन को कॉलेज से निलंबित हुए तीन दिन हो चुके थे।इन तीन दिनों में उसने मेडिकल की किताबें तो कई बार खोलीं, लेकिन हर बार कुछ ही मिनटों में बंद कर देता।वह खुद से ही परेशान था।कमरे की बालकनी में खड़ा उसने गहरी साँस ली।"ये मुझे हो क्या गया है...?"उसके दिमाग में बार-बार एक ही चेहरा घूम रहा था...आयत।उसने खुद से कहा,"मैं तो उसे ठीक से जानता भी नहीं... फिर भी बार-बार उसी का चेहरा क्यों याद आता है?""जब तक उसे देख नहीं लेता... मन बेचैन-सा रहता है।""ये आखिर कैसा एहसास है?"उसे अपने ही सवालों