भाग – 3 : "मुझे उसी कमरे में रहना है"सुबह के आठ बजे थे।पूरे हॉस्टल में सिर्फ़ एक ही बात हो रही थी—"नई लड़की के हाथ पर 407 कैसे लिखा आया?"कोई कह रहा था यह अपशकुन है।कोई कह रहा था कि अब वह ज़्यादा दिन हॉस्टल में नहीं रहेगी।लेकिन इन सबसे बिल्कुल अलग...आरोही अपने बिस्तर पर बैठी मुस्कुरा रही थी।उसने हथेली पर बने 407 को गौर से देखा और फिर धीरे से अपनी उँगली फेर दी।"मार्कर भी नहीं है..."वह बुदबुदाई।"तो फिर किसी ने लिखा कैसे?"नैना डरकर बोली,"तुम... तुम हँस क्यों रही हो?"आरोही ने उसकी तरफ देखा।"क्योंकि जितनी डरावनी ये कहानी