---*Chapter 2: पानी वाली शक्ति ~ 1200 शब्द*जंगल। रात। चांद पूरा।अर्जुन की तलवार रेशमा की गर्दन पर थी। "आत्मसमर्पण करो।"रेशमा हंसी: "राजकुमार, तलवार से आग नहीं बुझती।"तभी बादल गरजे। बारिश शुरू। रेशमा की आंखों से आंसू नहीं, पानी की धारा निकली।*सपक!* जमीन से पानी का फव्वारा निकला। अर्जुन 10 फीट पीछे उड़ गया।रेशमा: "ये मेरी दूसरी शक्ति है। आग के बाद पानी।"अर्जुन उठा। भीग गया। "तुम... तुम इंसान नहीं हो।" रेशमा: "और तुम इंसान होकर भी पत्थर हो।"तभी 5 सिपाही आए। "पकड़ो इसे!"रेशमा ने हाथ घुमाया। हवा + पानी मिलकर बवंडर बना। सब उड़ गए।बूढ़ी औरत: "बेटी भाग। तेरी तीसरी शक्ति अभी जागनी बाकी है।"रेशमा