दोनों आमने-सामने बैठ गए।दुकान में रखी पुरानी लकड़ी की कुर्सियों पर दोनोंआमने-सामने बैठ गए।अवंतिका ने बिना भूमिका बाँधे पूछा,"आपकी कलाई पर जो निशान है... वही निशान काली कोठी की दीवारों पर भी बना है। वह क्या है?"वीर ने अपनी कलाई की तरफ देखा।जले हुए निशान पर उसकी उँगलियाँ कुछ पल ठहर गईं।"इसे त्रिकाल बंधन कहते हैं।""मतलब?""यह बहुत पुराना चिन्ह है। कहा जाता है कि यह अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाला प्रतीक है। जिसने इसे स्वीकार किया... उसका जीवन इस रहस्य से हमेशा के लिए जुड़ जाता है।""आपने यह कब बनवाया?"वीर की आँखें कुछ पल के लिए झुक गईं।"जिस