पेड़ की दरार एक झटके में पूरी तरह फट गई और उसके भीतर कैद वह विकृत आकृति भारी आवाज के साथ बाहर आ गिरी जमीन पर गिरते ही उसके शरीर से काली धुंध निकलने लगी और आसपास की हवा अचानक जम सी गई। मंडल की रेखाएँ काँप उठीं और एक-एक करके दो दीपक धीमे पड़ने लगे।तांत्रिक ने तुरंत अपने हाथ की मुट्ठी में राख भरी और आगे फेंकीतांत्रिक- पीछे हटो, कोई भी इसके सामने मत आना।आरव ने बिना समय गंवाए रोहित और उसके परिवार को पीछे धकेलाआरव- सब लोग दीवार के पास जाओ, एक साथ रहो, कोई अलग नहीं होगा।रोहित