Ghost hunters - 19

  • 633
  • 1
  • 213

हवा में अब स्थिरता नहीं थी वो काँप रही थी जैसे दो अदृश्य ताकतें एक-दूसरे को धकेल रही हों मंडल के भीतर जलते दीपक कभी तेज़ हो जाते, कभी धीमे और हर बार उनके साथ पेड़ की दरारें भी गहरी होती जातींतांत्रिक ने अपनी जगह नहीं छोड़ी उसके दोनों शिष्य मंत्र की गति बढ़ा चुके थे उनके स्वर अब एक लय में बंध गए थेतेज़, स्थिर और भारी“ॐ भैरवाय नमः… ॐ भैरवाय नमः…”मंडल की रेखाएँ हल्की चमकने लगीं।बाहर खड़ा दूसरा तांत्रिक बस देख रहा था… उसके चेहरे पर अब भी वही शांत मुस्कान थी। जैसे ये सब पहले से तय