Devil की दास्तान - 15

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(हवेली के अँधेरे कमरे में सिमरन बैठी है। उसका चेहरा डर और असहायपन में डूबा हुआ है। करण उसके सामने बैठा है। उसके लाल आँखे जल रही हैं, पंख फैल चुके हैं।)"करण की प्यास…उसका जूनून…अब सीमा पार कर चुका था।सिमरन की मासूमियत उसके लिए जैसे जहर और मिठास दोनों थी।"(सिमरन कांपती है, अपने हाथ जोड़कर करण की ओर देखती है।)Simran (घबराकर, धीमी आवाज़ में) बोली - "कृपया… मुझे मत मारिए …मैं तो आपकी पत्नी हूं ना। मैं… मैं डर गई हूँ…"(लेकिन करण की लाल आँखों में अब नियंत्रण कम दिखता है। उसकी प्यास उसे तेजी से खींच रही है।)Karan (धीमी, खतरनाक आवाज़