(घना जंगल, ऊपर आसमान में अमावस्या की काली चादर फैली हुई है। समंदर का काला पानी हल्की-हल्की तरंगें ले रहा है।)करण अपने पंख फैलाकर सिमरन को अपनी बाँहों में उठाकर आकाश में उड़ रहा है। उसकी रफ्तार किसी चीते से भी तेज़, किसी चील से भी ऊँची। सिमरन डरी-सहमी उसकी छाती से लिपटी है।)*Simran (काँपती आवाज़ में) बोली - "सर… ये क्या हो रहा है? हम कहाँ जा रहे हैं? ये लोग हमारे पीछे क्यों हैं? आप उड़ भी सकते हैं?"(सिमरन ऊपर देखती है कि करण की बिरादरी — दर्जनों लाल आँखों वाले शैतान — हवा में उसका पीछा कर रहे