"ऊँआ... ऊँआ...!!"अभी अभी जन्में एक बच्चे की तीखी आवाज आसपास फैले खौफनाक सन्नाटे को चीर रही थी,, हवा में एक अजीब सा दमघोंटू भारीपन था। हर सांस के साथ फेफडों में बारूद की तीखी जलती हुई गंध, झुलसते मांस की सडन और ताजे गर्म खून की लोहे जैसी महक साफ महसूस की जा सकती थी, जो किसी भी आम इंसान की रूह कंपाने के लिए काफी थी।चारों ओर सिर्फ तबाही का मंजर था। टूटे हुए खंभे, जलते रेशमी पर्दे और जमीन पर बिखरी हजारों लाशें। ये सब उस जगह की बर्बादी को चीख चीखकर बयां कर रहे थे।इस दौरान... एक