शहर की साफ और चौडी सडक पर कबीर मेहरा की नई' मेबैक' किसी काले चीते की तरह हवा से बातें कर रही थी. कबीर मेहरा—शहर का वो नाम जिससे बिजनेस के गलियारों में सन्नाटा पसर जाता था. उसके लिए वक्त ही खुदा था और उसे बर्बाद करना कबीर की डिक्शनरी में पाप था. अपनी गाडी की पिछली सीट पर बैठा कबीर अपने आईपैड पर कुछ ग्राफ देख रहा था, पर उसका ध्यान बार- बार घडी की सुइयों पर जा रहा था. उसे आज तीन दिन की एक बेहद जरूरी इंटरनेशनल बिजनेस ट्रिप के लिए निकलना था। थोडा और तेज चलाओ,