अधूरे तार: रूहों का मौन संवादनील नीले समंदर के किनारे बसे एक शोर शराबे वाले शहर की बीसवीं मंजिल पर खड़ी 'सहर' अपनी खिड़की से डूबते सूरज को देख रही थी। वहीं, यहाँ से ठीक दो हज़ार किलोमीटर दूर, बर्फ से ढके पहाड़ों की एक छोटी सी झोपड़ी के बाहर 'आर्यन' जलती हुई लकड़ियों के पास बैठा आसमान के उसी सूरज को ओझल होते देख रहा था। सूरज तो एक था, पर उनकी दुनिया के बीच का फासला इतना बड़ा था कि उसे तय करना किसी सपने जैसा लगता था।वे कभी मिले नहीं थे। उनकी मुलाक़ात एक ऑनलाइन राइटिंग फोरम