स्वयंवधू - 66

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66. हमारा इतिहास भाग 1"वृषाली चाकू मत चालान!", कवच महाशक्ति को प्यार से समझा ही रहा था की उसने ज़ंजीर के सीने में चाकू उतार दी। खून के लाल छीटे दोनों पर छिटक गए। पूरा कमरा लहू लुहान हो गया। कवच इतना खून देखकर सन रह गया।अटकते हुए उसके मुँह से अविश्वास के साथ निकला, "...तुमने... तुमने यह क्या किया?", जबकि महाशक्ति अपने स्वभाव से उलट बिना सहमे व्यस्त थी। उसने कवच को अनसुना कर उसने चाकू को एक पेशेवर कसाई की तरह पकड़ा और उसे काटने लगी।उसने धीरे से अपने हाथ में पकड़े धारदार चाकू ज़ंजीर के गले में उतारी।पसीने