शब्द और सत्य - भाग 7

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19.मित्र वही, जो सत्य दिखाएदोस्त वो नहीं, जो तुम्हारी 'हाँ' में अपनी 'हाँ' मिलाए,असली मित्र वो है, जो तुम्हारे झूठ पर कोड़े बरसाए।जो तुम्हारे साथ बैठकर, महज़ वक्त को न बर्बाद करे,वो मित्र है जो तुम्हारी चेतना को, अज्ञान से आज़ाद करे।अगर वो तुम्हारी बुराइयों पर, चुप रहकर मुस्कुराता है,तो समझो वो दोस्त नहीं, तुम्हें गर्त की ओर ले जाता है।भीड़ का हिस्सा जो बने, वो तो बस एक सौदागर है,जो तुम्हें अकेला छोड़ सके सत्य के लिए, वही असली रहबर है।चापलूसी की चाशनी से, जो तुम्हारे अहंकार को पालेगा,वो तुम्हें उजाले में नहीं, और गहरे अंधेरे में डालेगा।मित्र वो—जो