भाग - 4 धीरे-धीरे आवाज़ें वापस आने लगीं पहले एक हल्की सीटी जैसी गूंज फिर टूटती लकड़ियों की आवाज और फिर—किसी के खांसने की कबीर ने आँखें खोलीं चारों तरफ धुआँ था दीवारें आधी टूट चुकी थीं“अगर ये स्वर्ग है तो maintenance बहुत खराब है”उसने उठने की कोशिश की—“आह… नहीं ये definitely स्वर्ग नहीं है”थोड़ा आगे उसे आरव दिखा वो जमीन पर पड़ा था… बिल्कुल हिल नहीं रहा था।कबीर घबराया—“आरव! ओए उठ! आरव तुम हमें ऐसे छोड़ कर नहीं जा सकते” कबीर ने उसका pulse check किया धीमा लेकिन था “ठीक है तू अभी मरा नहीं है लेकिन अगर जल्दी नहीं उठा