4: लक्ष्य: कहीं पहुँचना या सब कुछ छोड़ना?जिसे तुम 'लक्ष्य' कहते हो, वो बस मन का एक नया ठिकाना है,अधूरेपन से भागने का, एक नया और सुंदर बहाना है।तुमने सोचा कि मिल गया पद, पैसा और जग में सम्मान,तो पूरा हो गया जीवन तुम्हारा, और मिल गया तुम्हें निर्वाण?नहीं! जिसे तुम जीत समझते हो, वो बस अहंकार की एक नई ऊँचाई है,सत्य की राह पर ये तरक्की नहीं, बल्कि रूह की गहरी खाई है।पशु भी पेट भरता है, और सुरक्षा में ही सो जाता है,अगर तुमने भी बस यही किया, तो तेरा जन्म व्यर्थ हो जाता है।जीवन का लक्ष्य कोई