कहानी – नई शुरुआत कस्बे के पुराने मोहल्ले में एक मकान था—लाल ईंटों से बना, जिसके बरामदे में नीम का पेड़ झुका हुआ था। बरसों तक यह मकान बच्चों की हँसी, किताबों की सरसराहट और अध्यापक आत्माराम की गूँज से भरा रहा। आज वही मकान, वृद्ध दंपति आत्माराम और शांता के लिए नई शुरुआत का पुरस्कार बन गया था। आत्माराम और शांता का सम्मान हुआ था। उन्हें मंच पर बुलाया गया, नारियल और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया था । तालियों की गड़गड़ाहट के बीच आत्माराम की आँखें नम हो गईं। शांता ने धीरे से कहा— “देखो, यह वही