नई राह

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New  नई राह मसूरी की पहाड़ियों पर हल्की धुंध तैर रही थी। सुबह का समय था, लेकिन ठंड में एक अजीब-सी नमी घुली हुई थी। उसी धुंध के बीच एक सत्तर वर्षीय आदमी व्हीलचेयर पर बैठा, वृद्धाश्रम “आसरा” के बाहर खड़ा था। उसकी आंखें खुली थीं, पर आवाज़ जैसे कहीं खो गई थी। होंठ हिलते तो थे, पर शब्द बाहर नहीं आते थे। दरवाज़े पर लगे कैमरे से उसे देख रहे मैनेजर ने तुरंत दो कर्मचारियों को भेजा। वे धीरे-धीरे उसे भीतर ले आए। पूछने की कोशिश की—“नाम क्या है आपका?” वह कुछ कहना चाहता था… पर गला साथ नहीं