अद्वैत वेदांत 2.0: जीवन, माया और अज्ञात के चक्र का व्यापक दार्शनिक एवं वैज्ञानिक विश्लेषण मानव अस्तित्व के इतिहास में 'स्व' और 'सत्य' की खोज एक निरंतर प्रक्षेपवक्र रही है, जो प्राचीन उपनिषदों के 'ऋषियों' से लेकर आधुनिक 'तंत्रिका वैज्ञानिकों' तक फैली हुई है। इस अन्वेषण के केंद्र में 'अद्वैत वेदांत' की वह परंपरा रही है जो जीव, जगत और ब्रह्म के अभेद को प्रतिपादित करती है। वर्तमान संक्रमणकालीन युग में, जहाँ तकनीक और पदार्थवाद ने मानव चेतना को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है, एक नवीन दार्शनिक ढाँचा 'वेदांत 2.0' के रूप में उभर रहा है।