माई डियर प्रोफेसर - भाग 17

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----------------चारू ने सर उठाकर देखा तो अमर होंठ भींच उसे ही देख रहा था। उसकी उंगलिया पेंट पर कसी हुई थी । आंखे हैरानी और चिढ के मिले जुले भाव से सिकुड गई थी।चारू की सांसे तेज हो गई। वो अमर को ऐसे देख रही थी मानो यमराज सामने खडा हो । उसका दिल जोरो से धड़कने लगा। आँखे डर से और शर्म के मीले जुले भाव से फैल गई।  दिसंबर की सर्दी मे भी , चारू के पसीने छुट गए।  उसकी पुतलिया घूमी....और अगले ही पल—धम्म!!!!!अमर की आंखे फैल गई।  उस जगह पर मौजूद हर एक इंसान आश्चर्य से