भाग 9: परीक्षा तीन, त्याग की कसौटीतीसरे दिन की सुबह चंद्रनगर में बारिश के साथ आई। वर्मा हवेली की छत पर बारिश की बूंदों की आवाज़ एक सुरीला संगीत बना रही थी, पर आर्यन, मृया और विजय के लिए, यह आवाज़ एक अशुभ संकेत जैसी लग रही थी।"त्याग," विजय ने कहा, छत के शेड के नीचे बैठे हुए। "मेरे पास तो त्यागने के लिए कुछ है ही नहीं। मैं तो पहले ही सब कुछ त्याग चुका हूँ, जीवन, प्रेम, सब कुछ।"मृया ने उसकी ओर देखा, उसकी आँखों में दर्द था। "हम सभी ने त्याग दिया है। मैंने अपनी पहचान त्याग