अध्याय 1: वह पहला सावन और स्कूल की दहलीजसुपौल की उन पुरानी गलियों में उस दिन आसमान से यादों की बौछार गिर रही थी। मिट्टी की वह सोंधी खुशबू हवाओं में घुली थी। स्कूल की घंटी बज चुकी थी, लेकिन मोहन के कदम वहीं जम गए थे। तभी, बारिश की तेज़ फुहारों के बीच से भागती हुई एक लड़की स्कूल की दहलीज पर रुकी। वह मीनाक्षी थी। सफेद स्कूल ड्रेस का पल्लू भीगा हुआ था। उसने अपनी ज़ुल्फों को एक झटके से झटका, और पानी की नन्हीं बूंदें मोहन के चेहरे पर गिरीं। शायद वही वो पल था जब मोहन