ख़ौफ़ और तबाही - 2

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तबाही का शिखर हिसाब का दिन विनाशराज अघोर की मौत सिर्फ़ एक आदमी की मौत नहीं थी वह उस डर की पहली दरार थी जिस पर पूरा साम्राज्य खड़ा था जैसे ही उसकी लाश ज़मीन पर गिरी वैसे ही पूरे इलाक़े में एक अजीब सी बेचैनी फैल गई, सैनिकों की चाल बदल गई मज़दूरों की आँखों में पहली बार सवाल दिखा और महल की दीवारों के भीतर बैठा अंधकारनंद समझ गया कि खेल अब शतरंज से आगे बढ़ चुका हैइस बेचैनी को सबसे पहले महसूस किया कालसिंह तिमिरगहन ने वह आदमी जो हमेशा चुप रहता था क्योंकि उसे पता था कि