सब लोग अगस्त्य को उसके घर ले आए। अर्जुन ने रास्ते में ही डॉक्टरों की पूरी टीम और सारी मशीनें मंगवा ली थीं — क्योंकि अगस्त्य मान का अस्पताल जाना मुमकिन नहीं था। दुश्मन की नज़रें हर जगह थीं।अगस्त्य को बेड पर लिटाया गया। उसका चेहरा पीला पड़ चुका था, होंठ सूखे थे — फिर भी उसने आँखें खोलने की कोशिश की।उसके होंठ हिले..."का... कानि... रा... रात्रि..."बस इतना — और वो बेहोश हो गया।कमरे में सन्नाटा छा गया।डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन की तैयारी शुरू की।काफी देर बाद डॉक्टर बाहर आए। उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिख रही थीं।"गोली