आरव घर में बहुत स्ट्रीक होकर रहता था दादी को छोड़ कर सभी घर वाले उससे डरते थे आरव को घर में दादी के अलावा और किसी से मतलब था भी नहीं आरव का एक ओर चेहरा था जो सिर्फ दादी के सामने ही आता था दादी उसके लिए सब कुछ थी जो आरव बाहर वाले के लिए हैवान था वहीं दादी के सामने बच्चा बन जाता बच्चों की तरह दादी से प्यार करता रोजाना ऑफिस से आने के बाद दादी की गोद में घंटों सोता अपनी मां को याद करता रहता इधर ईशानी क्लास में बैठी परेशान हो रही खुद से ही