भाग 3: शाश्वत काल का दंशआर्यन की नींद उस रात टूटी हुई थी। मृया के जाने के बाद से ही उसके मन में असंख्य प्रश्न भंवर की तरह घूम रहे थे। उसने अपनी कलाई के निशान को बार-बार देखा। वह स्त्री का हाथ अब और स्पष्ट होता जा रहा था, जैसे कोई कलाकार धीरे-धीरे उसे पूरा कर रहा हो।उसकी घड़ी में रात के 2:30 बजे थे। मृया ने 3:07 का जो समय बताया था, उसकी प्रतीक्षा करते हुए आर्यन ने अपना लैपटॉप खोला। 'मृया' नाम को गूगल पर सर्च किया।परिणाम सामान्य थे, कविताएँ, गाने, कुछ लोक कथाएँ। हिंदी में मृया