एपिसोड 5: आरव का सामना और रिया का साहस सुबह की धूप पटना की गलियों में फैल रही थी। चाय की दुकानों से उठती भाप और मोहल्ले के बच्चों की हंसी हवा में घुली हुई थी। लेकिन रिया के घर का माहौल भारी था। मां चुपचाप रसोई में काम कर रही थीं, उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं। रिया की आंखें रात भर रोने से लाल थीं। दिल में डर और उम्मीद दोनों साथ-साथ पल रहे थे। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। रिया ने दरवाजा खोला – सामने आरव खड़ा था। नीली शर्ट, गंभीर चेहरा और हाथ में