सुबह का समय है, सूरज की रोशनी बिल्डिंग पर पड़ रही है,पर अंदर के माहौल में अब भी एक अजीब ठंडक और खामोशी है।श्रव्या लिफ्ट के सामने खड़ी है। हाथ में ऑफिस फाइलें हैं, पर चेहरा उतरा हुआ है। वो बार-बार लिफ्ट की तरफ देखती है — जैसे उसका दिल ऊपर जाने से डर रहा हो।श्रव्या (धीरे, खुद से बड़बड़ाते हुए) बोली - ऊपर नहीं जाऊँगी... बस अपने केबिन तक...ऊपर नहीं... वहाँ अब कोई नहीं है... फिर भी डर लगता है...।लिफ्ट की टिंग की आवाज़ आती है। वो चौंक जाती है।धीरे-धीरे अंदर कदम रखती है, पर 7th फ्लोर का बटन दबाकर