राजा विक्रमादित्य ने बेताल को पेड़ से उतार कर अपने कंधे पर डाल कर उस साधु के पास जाने के लिए निकल पड़े।बेताल ने कहा, “राजा विक्रम, तुम बहुत साहसी हो, रास्ता काफी लंबा है इसलिए मैं तुम्हें एक कहानी सुनाऊंगा। पर तू बीच मैं कुछ मत बोलना है याद रख ये मेरी शर्त है तू कुछ भी बोला तो मैं वापस से आपने पेड़ पर लौट जाऊंगा। कहानी के अंत में मैं तुझे एक प्रश्न पूछूंगा अगर तुमने जवाब जानते हुए भी उतर नहीं दिया, तो मैं तेरे सर के टुकड़े टुकड़े कर दूंगा।”विक्रम चुपचाप चलते रहे। बेताल ने