आयान का मन शिजा को लेकर उसी दिन से उलझन में था। वह हर दिन लाइब्रेरी में अपनी जगह पर बैठी रहती, अपनी किताबों में इतनी खो जाती कि जैसे दुनिया की बाकी चीज़ों का उसे कोई ध्यान ही नहीं रहता। उसका चश्मा और पढ़ने का उसका तरीका—सब कुछ आयान को अपनी ओर खींच रहा था।लेकिन वह उससे बात करने का सही समय नहीं ढूंढ पा रहा था। वह नहीं चाहता था कि शिजा असहज महसूस करे, फिर भी उसके मन में एक सवाल बार-बार उठता—“क्या वह मुझे पसंद करती है?”आज जैसे ही वह लाइब्रेरी में दाखिल हुआ, आयान का